लखनऊ में एसजीपीजीआई (Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences) की तरफ से एक बड़ी खबर आ रही है। अब यहां सिर और गर्दन के मुश्किल ऑपरेशंस और भी आसान और सेफ हो जाएंगे। बहुत जल्द ही इस इंस्टीट्यूट में दो नए 'द विंची' रोबोट सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत हो सकेगी। यह जानकारी खुद एसजीपीजीआई के डायरेक्टर, प्रोफेसर आरके धीमन ने दी। उन्होंने यह बात शनिवार को हेड एंड नेक सर्जरी डिपार्टमेंट में हुई एक नेशनल लेवल की कैडेवर वर्कशॉप के दौरान बताई।
रोबोटिक सर्जरी से क्या होगा फायदा?
रोबोटिक सर्जरी का मतलब है कि डॉक्टर्स रोबोट की मदद से ऑपरेशन करेंगे। इससे सर्जरी में और भी ज्यादा बारीकी (precision) और सेफ्टी आएगी। सिर और गर्दन के ऑपरेशंस वैसे भी बहुत नाजुक होते हैं, ऐसे में रोबोट का इस्तेमाल मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।
डिपार्टमेंट की शानदार परफॉर्मेंस
हेड एंड नेक सर्जरी डिपार्टमेंट ने पिछले एक साल में बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने सिर्फ 11 महीनों में 9 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज किया है और 300 से ज्यादा सर्जरी भी की हैं। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
वर्कशॉप में देशभर से आए डॉक्टर्स
यह वर्कशॉप एसजीपीजीआई ने केजीएमयू (King George's Medical University) के साथ मिलकर ऑर्गनाइज की थी। इसमें पूरे देश से 70 डॉक्टर्स ने हिस्सा लिया। इन डॉक्टर्स ने यहां मुश्किल सर्जरीज की बारीकियां सीखीं। वर्कशॉप में लाइव डेमो और एक्सपर्ट्स के लेक्चर खास अट्रैक्शन थे।
- डीन शालीन कुमार ने कैंसर के इलाज में मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम (यानी अलग-अलग फील्ड के डॉक्टर्स की टीम) की अहमियत बताई।
- डिपार्टमेंट के हेड, अमित खेसारी ने बताया कि वर्कशॉप में आए डॉक्टर्स को 'फ्रोजन कैडेवर' (यानी प्रिजर्व्ड डेड बॉडी) पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई।
- इस मौके पर देश भर के कई एक्सपर्ट्स ने अपने एक्सपीरिएंस शेयर किए और नई-नई टेक्निक्स पर चर्चा भी की।
यह खबर वाकई लखनऊ और मेडिकल फील्ड के लिए बहुत अच्छी है। रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाएगा और डॉक्टर्स को भी एडवांस टेक्निक्स सीखने का मौका मिलेगा।