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सरकारी खजाने की खुली बर्बादी: पूर्वी दिल्ली की झील बनी क्रिकेट का मैदान, पानी की जगह लग रहे चौके-छक्के।

सरकारी खजाने की खुली बर्बादी: पूर्वी दिल्ली की झील बनी क्रिकेट का मैदान, पानी की जगह लग रहे चौके-छक्के।

पूर्वी दिल्ली के यमुनापार इलाके की कभी शान मानी जाने वाली वेलकम झील आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। एक समय में यह झील न केवल स्थानीय निवासियों के लिए सुकून का केंद्र थी, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी इस घनी आबादी वाले क्षेत्र के लिए एक फेफड़े के समान कार्य करती थी। लेकिन वर्तमान समय में प्रशासन की घोर अनदेखी और रखरखाव के अभाव के कारण यह झील अब केवल गंदगी और बदहाली का प्रतीक बनकर रह गई है।

गंदगी और प्रदूषण का केंद्र बनी झील

झील की वर्तमान स्थिति को देखकर यह विश्वास करना कठिन है कि कभी यहाँ प्रवासी पक्षी आया करते थे और लोग दूर-दूर से इसकी सुंदरता देखने पहुँचते थे। आज झील का पानी पूरी तरह से काला पड़ चुका है और इसकी सतह पर जलकुंभी व प्लास्टिक के कचरे का साम्राज्य है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, झील में आसपास की कॉलोनियों का सीवेज और कचरा सीधे गिर रहा है, जिसकी वजह से पानी से उठने वाली भीषण दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

स्थानीय निवासियों की मुख्य शिकायतें:

  • स्वास्थ्य का खतरा: झील में जमा गंदा पानी मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है, जिससे क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा हर समय बना रहता है।
  • दुर्गंध की समस्या: झील से उठने वाली सड़न भरी बदबू के कारण आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को अपनी खिड़कियां और दरवाजे हमेशा बंद रखने पड़ते हैं।
  • असुरक्षित वातावरण: झील के चारों ओर बने पैदल पथ (ट्रैक) और पार्क अब जर्जर अवस्था में हैं। स्ट्रीट लाइटें खराब होने के कारण रात के समय यहाँ अंधेरा रहता है, जिससे यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है।

प्रशासनिक उदासीनता और झूठे वादे

यमुनापार की इस धरोहर को बचाने के लिए क्षेत्र के लोग लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। स्थानीय आरडब्ल्यूए (RWA) और पर्यावरण प्रेमियों ने कई बार दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और संबंधित नगर निगम के अधिकारियों को पत्र लिखे हैं, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया है। निवासियों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े नेताओं द्वारा झील के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के वादे तो किए जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही इन वादों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

पर्यावरण पर पड़ता प्रतिकूल प्रभाव

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वेलकम झील जैसी जल संरचनाएं शहरी इलाकों में भूजल स्तर (Groundwater Level) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि इस झील का समय रहते पुनरुद्धार नहीं किया गया, तो न केवल यह पूरी तरह सूख जाएगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में पानी की किल्लत और अधिक बढ़ जाएगी। झील के पारिस्थितिकी तंत्र का विनाश स्थानीय जैव विविधता के लिए भी एक बड़ा झटका है।

आज वेलकम झील की हालत यह है कि इसके किनारे बने बेंच टूटे पड़े हैं, हरियाली गायब हो चुकी है और चारों तरफ केवल कूड़े के ढेर नजर आते हैं। स्थानीय जनता अब मांग कर रही है कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। झील की गाद निकालने, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को सक्रिय करने और पार्कों की मरम्मत करने की सख्त जरूरत है ताकि इस ऐतिहासिक पहचान को विलुप्त होने से बचाया जा सके।

निष्कर्षतः, वेलकम झील का संरक्षण केवल एक सौंदर्यीकरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह यमुनापार के लाखों लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो दिल्ली अपनी एक और महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर को हमेशा के लिए खो देगी।

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