उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्र में आज सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां बिजली के टूटे हुए हाईटेंशन तार की चपेट में आने से एक मेहनतकश किसान की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया। बिजली विभाग की घोर लापरवाही से नाराज परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर लखनऊ-हरदोई मार्ग को पूरी तरह से जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विभाग को कई बार जर्जर तारों की शिकायत की गई थी, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी, जिसका खामियाजा आज एक गरीब किसान को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।
खेत में काम करते समय हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना लखनऊ के मलिहाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव की है। मृतक किसान, जिसकी पहचान 45 वर्षीय राम खिलावन के रूप में हुई है, आज सुबह हमेशा की तरह अपने खेत में काम करने गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खेत के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन का एक तार काफी समय से जर्जर स्थिति में था और नीचे की ओर लटका हुआ था। काम के दौरान किसान का ध्यान उस तार की ओर नहीं गया और वह अनजाने में उसकी चपेट में आ गया। जोरदार करंट लगने के कारण किसान दूर जा गिरा और कुछ ही मिनटों में उसने दम तोड़ दिया। पास के खेतों में काम कर रहे अन्य किसानों ने जब धुआं उठते देखा, तो वे दौड़कर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
ग्रामीणों का भारी आक्रोश और चक्का जाम
हादसे की खबर जैसे ही गांव में फैली, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और मृतक के परिजन मौके पर इकट्ठा हो गए। बिजली विभाग के प्रति लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस को शव उठाने से मना कर दिया और मृतक के शरीर को मुख्य सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सड़क जाम होने के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषी अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें:
- मृतक किसान के परिवार को 50 लाख रुपये का उचित मुआवजा दिया जाए।
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
- क्षेत्र के सभी जर्जर बिजली के तारों और खंभों को तत्काल बदला जाए।
- लापरवाही बरतने वाले संबंधित बिजली उपकेंद्र के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
पुलिस और प्रशासन का हस्तक्षेप
सड़क जाम और बढ़ते तनाव की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ-साथ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स को तैनात करना पड़ा। काफी घंटों की मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद, प्रशासन ने आश्वासन दिया कि बिजली विभाग के खिलाफ जांच बैठाई जाएगी और पीड़ित परिवार को सरकारी नियमानुसार अधिकतम आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है जब बिजली विभाग की लापरवाही सामने आई हो। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायत दी थी कि खेतों के ऊपर से गुजरने वाले तार काफी नीचे लटक रहे हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन विभाग के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। लोगों का आरोप है कि विभाग केवल बिल वसूली में सक्रिय रहता है, जबकि बुनियादी ढांचे के रखरखाव और सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की जाती है।
फिलहाल, पुलिस ने किसान के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उच्च अधिकारियों के दखल के बाद सड़क से जाम हटा लिया गया है और यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। हालांकि, गांव में अभी भी तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस बल सुरक्षा के मद्देनजर तैनात है। प्रशासन ने दावा किया है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।